लोग कहेगें!

By Saumya Manan

 

 

क्या? नौकरी नहीं करती ?
 
तो घर कैसे चलाएगी ?
 
 
 
अजी, कविता लिखती है, कहानियां बनाती है।
 
भला, इस काम से पैसे क्या कमाएगी ?
 
 
 
अगर पैसे नहीं कमाएगी,
 
तो बोझ बन कर रह जाएगी ।
 
अरे! बेटी ही है साहब,
 
अफ़सर कहाँ बन पाएगी ।
 
देर से घर आएगी, सुबह को जल्दी जाएगी,
 
बच्चों की देखभाल, पति की सेवा कैसे कर पाएगी?
 
घर पर रही तो बराबरी भी नहीं कर पाएगी,
 
पर अगर बाहर गई तो हाथ से निकल जाएगी ।
 
रुतबा होगा तो रौब चलाएगी ।
 
घर पर रखोगे तो काबू कर पाओगे,
 
नहीं तो दुनिया तो चार बातें ही बनाएगी ।
 
 
 
ठहर जाईए जनाब, यह कह कर वो अपनी बात सुनाएगी,
 
अपने मन की आवाज़ दुनिया तक पहुंचाएगी ।
 
"दुनिया से पहले मेरी फिक्र मुझे करने दीजिए,
 
सही गलत का फैसला आप मत लिजिए,
 
कवि हूँ, किसी का बोझ मत समझिये,
 
मेरे पंखों को काट कर, मुझेमजबूर ना कीजिए ।
 
 
 
कला की ताकत तुम्हारी सोच को चीर जाएगी,
 
समाज की बंदिशो को तोड़ अपनी मंज़िले, वो खुद बनाएगी ।
 
लोग कहेगें, बार बार कहेगें,
 
बेटी है साहब, वो हार के नहीं आएगी ।"

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This poem won in Instagram Weekly Contest held by @delhipoetryslam on the theme 'What will people say / Log kya kahenge'

1 comment

  • One of my favorites… So powerful💪!

    Kate M

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