By Shruti Gupta
जीत का जश्न मनाते हैं
तो फिर हार का क्यों नहीं
जीत और हार एक ही सिक्के के दो पहलु हैं
तो फिर दोनों को एक सा तवज्जो क्यों नहीं
जीत ख़ुशी लाती है
तो हार भी बहुत कुछ सिखाती है
जीत अगर एक सीढ़ी चढाती है
तो हर भी अनुभव बढाती है
हार को व्यक्तिगत हार न मान
एक नए ढंग से कोशिश करने का संकेत जान
उस सिख को याद रख, हार का जश्न मनाता चल
आज अगर हार है तो जीत भी आएगी कल