हार का जश्न – Delhi Poetry Slam

हार का जश्न

By Shruti Gupta  

 

जीत का जश्न मनाते हैं
तो फिर हार का क्यों नहीं

जीत और हार एक ही सिक्के के दो पहलु हैं
तो फिर दोनों को एक सा तवज्जो क्यों नहीं

जीत ख़ुशी लाती है
तो हार भी बहुत कुछ सिखाती है

जीत अगर एक सीढ़ी चढाती है
तो हर भी अनुभव बढाती है

हार को व्यक्तिगत हार न मान
एक नए ढंग से कोशिश करने का संकेत जान

उस सिख को याद रख, हार का जश्न मनाता चल
आज अगर हार है तो जीत भी आएगी कल


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