कौन से अल्फाज लिखूं – Delhi Poetry Slam

कौन से अल्फाज लिखूं

By Sanchita Bajaj 

 

आज कल तहरीरों पर ज़ोर है दिल-ए-नादां का
कौन से अल्फ़ाज़ लिखूं, जो तू आए 1.दश्त-ए-सहरा में बहारा हो
गुज़रे वक्त की हर बेवफाई, हर 2इज्तिमा जिल्लत भरी
3अदम-ए-खाक से उभरूँ, मेरे वजूद का नगाड़ा हो
ख्वाब, तसव्वुर, ख्याल-ए-शहर जो मैंने 4बसीरत किए
ऐसी 5जाँ-फ़ज़ा कलम से लिखूं, अनगिनत 2बज़्मों में एहतराम गंवारा हो
आज कल तहरीरों पर...

इस कफस की घुटन से मुझे निजात मिले
6 फासिक सय्याद को मेरे भी पासबान का इशारा हो
हर 7हारिज़, हर 8इंतिशार को पार कर दे
ऐसे 9 इसबात रच दूँ की मौजूदा वक्त हमारा हो
आज कल तहरीरों पर...

मुक्कदर से कोई 10 तशरीह, कोई 11 माज़रत नहीं मांगी मैंने
बस कज़ा से पहले दिल-निहाद का नज़ारा हो
मेरे 12लुटास लम्हें, मेरे 13 सब्र-ए-जीस्त को 14 समर मिले
ऐसी 15मुक्कदस स्याही से गढ़ दूँ, जन्मों का सहारा हो
आज कल तहरीरों पर...



1desert 2gathering 3non existence 4envision 5 life-giving/revitalizing 6who sins without repenting 7hinderer 8obstacle 9affirmation 10 explanation 11 excuse/apology 12plundered 13patience 14reward 15holy


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