हा, शायद वही स्वर्ग था !!!

By Abhishek Patel

वो जो दौर था 
बहोत ही हसीन था 
शायद वही स्वर्ग था 
जब मे अपने गांव मे था 
कहने को तो वो एक गांव था 
वही पे इंसानियत का जज़्बा था 
हर एक के दिल मे राम था 
पैसा नहीं, चरित्र ही इंसान का पहचान था 
वो लहराते दुपट्टे जैसा झरना था 
दूर दूर तक ज़मीन-आसमान का चुंबन था 
फसले भी लहराती ज़ुल्फो जैसी थी 
जैसे कोई रुपसुंदरी भी 
उसकी सुंदरता के आगे फीकी थी 
मिलते थे लोग हररोज़ 
बातो की खड़ी करते थे फौज 
बाते बनाना तो एक जरिया था 
कुछ वक़्त साथ बिताने का बहाना था 
बच्चो का भी अपना ही रंग था 
एक दूजे के साथ खेलने का उमंग था 
जंगल तो था 
पर सीमेंट का न था 
रिश्ते तो थे 
पर उसमे मतलब न था 
मकान छोटा था 
पर मन जैसे समुन्दर था  
पैसे तो कम थे 
पर खुशियों की कमी न थी 
मे तो तब बच्चा था 
पर जिंदगी वही पे समझा था 
आज मे सोच रहा था 
हा, शायद वही स्वर्ग था !!!

14 comments

  • बेहतरीन रचना 👌👌

    Sumita kanwar
  • Aflatoon 👌🏻👌🏻

    Varun Shah
  • Nice 👌🏻

    Mayank Suthar
  • Delicately written. Superb

    Akhilesh Sharma
  • Well wrote…. I can feel every sentence and I do agree “ha wahi swarg tha”.

    Abhishek Porwal
  • Superb 👌👌👌👌

    Sumita kanwar
  • Beautiful ❤️

    Palak
  • Mast.. :)

    Ajinkya
  • Beautifully imagined!

    Nikisha Hada
  • I literally got translicated to your villageand love the comparison in the end-

    Anshul Sura
  • Supercool

    Tejaswini kulkarni
  • Behatreen 💐💐💐

    Saransh dwivedi
  • heart touching

    Honey Shah
  • Superb…👌👍

    Vinay Patel

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