मेरा प्यारा रतलाम

By Shruti Garg

क्या बात कहूं इस जगह की
जहां बचपन बीता हैं मेरा,
हर शाम रंगीली हैं जिसकी
और खूबसूरत हैं हर सवेरा,

संकरी सी गलियां जिसकी,
जिनमे दौड़ा करते थे हम,
अपने से हैं यहां रास्ते सारे
और हर रास्ते के है हम।

वो चाय नुक्कड़ की
और नमकीन मजेदार,
खाने - खिलाने के शौकीन सभी,
आवभगत शानदार।

शुद्ध सोने से चम - चम चमके,
मेरा शहर बेमिसाल,
तारीफ जिसकी करता है
पूरा हिंदुस्तान।

स से सेंव
स से साड़ी,
स से सोना,
हैं जिसकी पहचान,
दिलवालों की नगरी हैं ये
मेरा प्यारा रतलाम,
मेरा प्यारा रतला


1 comment

  • Nice, nothing is more wonderful than the place we lived when we were children.

    Rajan V Kokkuri

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