मेरा कानपुर शहर

By Varsha Mishra

ये मानो जैसे कल की ही बात हो,
जब मां मुझे स्कूल के लिए तैयार करती थी,
और पापा थपकी दे कर सुलाते थे।
वो गालियां याद आती हैं,
जहां मै गिर कर एक बार फिर उठती थी,
वो दोस्त जिनकी दोस्ती की मिसाल,
मैं अब भी देती हूं।
वो चाय की टपरी जिसकी चाई,
 पूरे शहर में मशहूर थी।
वो भी एक वक़्त था जब हम,
कबड्डी खेल अपना मन बहला लिया करते थे।
होली और दीवाली परिवार संग मनाना,
और उन्हीं सड़कों पे रंगों से,
यादों को सजाना।
याद है वो दिन जब,
उस मेले में खो जाने पर,
अपनों के ना होने के डर को महसूस किया।
वो शहर जिसकी गलियों से वाकिफ हूं,
वहीं गलियां जिसके हर नुक्कड़ पे,
कुछ खूबसूरत यादें हैं बनाई।
वो कानपुर शहर जो मेरे जीवन का,
एक अभिन्न हिस्सा है,
वो कानपुर शहर जहां लोग अपने से लगते हैं,
जहां वापस लौट कर,
घर आने का एहसास होता है।
वही शहर जहां लोगों के घर छोटे हो सकते हैं,
पर उनका दिल उतना ही बड़ा रहेगा,
वही है 'मेरा कानपुर शहर'।

13 comments

  • वर्षा,
    सचमुच तुमने कानपुर शहर से अपने जुडाव को इतने सुन्दर तरीके से व्यक्त किया है वह प्रशंसनीय है, God Bless You…….

    Nagendra Dixit
  • इस रचना में शब्दों का चयन बहुत सुन्दर ।दिल से मंगल कामनाएं ।

    RAMANUJ TRIPATHI
  • A heartfelt poem which only a Karnpuriya can feel the depth.

    Manoj Gupta
  • Bahut sunder Rachana

    Usha Mishra
  • I’m on my way now😍😍

    Samyak Singh
  • Its so good. All the best.

    Divya Mishra
  • बहुत अच्छी कविता। कानपुर शहर के लोगों का बहुत ही सटीक वर्णन , ‘ छोटे घर और बड़े दिल ‘ । कानपुर का अपनत्व , कानपुर की परम्परायें , त्योहार गालियाँ, चाय सबको कविता में समेटा है वर्षा ने ।

    Amalendu Nath Misra
  • You’re equally good in Hindi poetry too.

    Vagish
  • बहुत सुंदर रचना है । बधाई हो

    ABHAI Srivastava
  • Amazing👏👏

    Shanu
  • Loved it!

    Nandini Sharma
  • Mere dil jeet liya aapne ….Behtareen …💐💐💐💐

    Saransh dwivedi
  • बहुत ही उम्दा

    Abhishek Patel

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