चार सो इक्यावन- मेरा घर

By Anshul Sura
सबसे पुराने सेक्टर की सबसे आख़री गली के पीछे से चौथे मकान की छत पर एक बच्ची दिन में सूरज और रात में चाँद से बातें किया करती थी 
आज उस बच्ची से कुछ सवाल हैं मेरे -
मेट्रो की भीड़ और swiggy के ज़माने में
क्या याद है तुझे 
वो ट्रेन के गुज़रने से घर के शीशों का हिलना
कामेश्वर क़ुल्फ़ी वाले की घंटी से दिन की नींद का उचटना! 
आज 24*7 इलेक्ट्रिसिटी और wifi के ज़माने में
याद है क्या तुझे?
लाइट चले पर छुपम छुपाई खेलना
और फ़्लॉपी डिस्क में स्कूल  प्रोजेक्ट save करवाना!
तब तो 
exams  में community centre की शादियों  से  ध्यान नहीं बँटता था 
बारिश  में साइकल चला छीटें उड़ाना भी नहीं खटकता था 
पिट्ठू फोड़, स्टप्पू और लँगड़ी टाँग से फ़ुर्सत  थी
साइकल रेस में कोई harade 
ऐसी किसी की हिम्मत   कहाँ थी।
नया सूट जब सिला पहली बार तो पूरी गली में चक्कर लगा आती थी
घर  से बस स्टॉप तक दादी माँ तीन बार आवाज़ लगाती थीं- बस  आ गयी है जल्दी आ वरना छूट जाएगी
यही तो उनकी सीख थी- बेटी खुलकर जी ले, वरना ज़िंदगी रेत की तरह छूट जाएगी।
जवाब उस बच्ची का-
हाँ याद है सब , कुछ छूटा नहीं है मुझसे
आज भी जब जाना होता है उस राह को तो
तारों  से  बातें करती हूँ 
दादी ने  जैसे सिखाया था- वैसे ही चाँद को राम राम करती हूँ
ट्रेन को देखने की उत्सुकता आज भी उतनी ही होती है
लाइट चले जाने पर आज भी रज़ाई  में छिप जाती हूँ
हाँ अब भी जब सब इकट्ठे होते हैं तो गाने मैं ही चलाती हूँ,
Community centre का तो पता नहींअपने घर को dance हॉल बना देती हूँ।
आज भी 5बजे के बाद घर में मन नहीं लगता है
पहले ख़ुद खेला करती थी , अब बच्चों संग मन बहलता है।
 उस शहर में बीता बचपन मुझे बहुत याद आता है
Swiggy से खाना पहुँचे ना पहुँचे,
सवामनी ka प्रसाद घर घर पहुँच  जाता है।
वहाँ बचपन है, थोड़ा लड़कपन है
 एक खुला आँगन है,बहुत सारा अपनापन है
एक छोटा सा शहर मेरा
जिसके सबसे पुराने सेक्टर की आख़री गली के
कोने में मेरा घर है
हाँ वहीं मेरा अपना घर है!

5 comments

  • সুন্দৰ কবিতা। পঢ়ি ভাল পালোঁ।

    Nice Writings. Loved it.

    KAMAL KALITA, Assam
  • Beautiful 👌🏻

    Neelam Agarwal
  • Nice writing, explained everything in such a simple words.

    Nandini sharma
  • Your writing binds people. Everyone can relate, or if not, they goes to their own memory lane of how the childhood to this adulthood; emotions, people, things have changed or remained same inherently.

    Aashish Kumar
  • बहुत ही उम्दा

    Abhishek Patel

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