अब घर जाने का दिल करता है

By Chetan Mahajan

अब घर जाने का दिल करता है

घूम लिया बाहर बहुत,

चौड़ में,

कर लिया अपने आप को,

नशे का ग़ुलाम,

जी लिया बेहद ,

अपनी मर्ज़ी से,

अब घर पर,

कुछ देर ऐसे ही TV देखने का,

दिल करता है,

इन सब नशों से दूर रहने का दिल करता है,

अब अपनी हदों में रहने का दिल करता है,

बस, अब घर जाने का दिल करता है ।

 

जो उसके बचपन के,

जवानी के थे साथी,

वो आज पूरी दुनिया घूम रहे हैं,

जलता है शायद दिल,

कभी - कभी सब की खुशी देख कर,

पर है एक दोस्त,

जिसके साथ,

आज भी घंटो बैठ कर बातें करने का दिल करता है,

कभी - कभी उससे मिलने के लिए ही,

घर जाने का दिल करता है ।

बस, अब घर जाने का दिल करता है ।

 

 

रात को अक्सर 9 - 9:30 के बीच,

जब मां अंधेरे में उस बच्चे को सुलाती थी,

डरता था उस अंधेरे से बहुत,

पर मां की बाजू को सिरहाना बना कर,

उसे नींद बड़ी प्यारी आती थी,

आज उस बच्चे से मिलने का दिल करता है,

बस, अब घर जाने का दिल करता है ।

 

आज भगवान है या नहीं, इस बात पर उलझा हूं,

बचपन में 5 - 5 अगरबत्तियों से घर महका देता था,

आज उस बच्चे की मासूम आँखें देखने का दिल करता है,

स्कूल में जो किताबें पाठ सीखा गईं,

वो आज फिर पढ़ने का दिल करता है,

बस, अब घर जाने का दिल करता है ।

 

 

सब ठीक है,

सब ठीक है,

इस झूठ को सारी दुनिया को सच की तरह बोल सकता हूं,

पर घर वालों को सच बताने का दिल करता है,

आज मेरा घर जाने का दिल करता है ।

 

 

खा लिया बहुत ढाबों में, तो कभी गत्तों के डिब्बों में खाना,

अब घर की वो थाली, जिस पर मेरा नाम जड़ा है,

आज उस पर पूड़ी-चने खाने का दिल करता है,

आज मेरा फिर घर जाने का दिल करता है ।


2 comments

  • Touching. Good job

    Harpreet Kaur
  • Beautiful ❤

    Harshada Pawar

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