दृश्य

अनिरुद्ध कृष्णा

वो ही दरिया , वो ही समंदर
वो ही पठार , वो हिम पर्वत ।
वो ही भू , वो ही ब्रह्माण्ड
वो ही स्थिर , वो ही गतिमान ।

वो अपरिमेय ऊंचाई भी
रहस्यमय गहराई भी ।
वो विख्यात कहानी सी
और गुमनाम परछाई भी ।

वो ही स्वर , वो ही कंठ
वो ही सुर , राग और तरंग ।
वो ही वीणा , वो ही संत
वो ही कलम और वो ही छंद ।

वो कल-कल बहती नदी
वो मासूम बच्चे की हंसी ।
वो ही रोदन , वो ही प्रसन्न
वो ही शांत और वो ही उमंग ।

वो ही कोलाहल , वो ही कौतूहल
वो ही कठिन , वो ही सरल ।
वो है परिश्रम , वो है हल
वो है कर्म , वो ही है फल ।

वो ही अश्रु , वो ही स्वेद
वो ही गूरू , वो ही वेद ।
वो ही सीख , वो ही अमल
वो ही शिष्ट , वो ही चंचल ।

वो ही आवारगी , वो है अनुशासन
वो ही उत्तेजना , वो है लगन ।
वो ही व्याकुल , वो है चिंतन
वो ही मुक्ति , वो ही है बंधन ।

वो ही शून्य , वो ही अनन्त
वो ही हासिल , वो ही व्यवकलन ।
वो ही आवृत्ति , वो ही परिवर्तन
वो ही तृष्णा , वो ही सम्पन्न ।

वो ही प्रेरणा , वो ही रचना
वो ही वास्तविकता , वो ही कल्पना ।
वो ही साहस , वो ही प्रयास
वो ही माया और वो ही विश्वास ।

वो ही इन्द्रिय , वो ही तथ्य
वो ही भय , वो ही सत्य ।
वो ही योग्य , वो ही नित्य
वो ही भूत , वर्तमान और भविष्य ।

9 comments

  • Hello, Anirudh. Found your poem here while looking for some good poems. Its a remarkable composition. Could you contact us at minakshi@airaani.in ? We would like to invite you to our poetry reading sessions in Delhi. Minakshi, from The Kaavya. You can find us at Instagram, Facebook and Twitter.

    Minakshi
  • Bro, are you real?

    Sharad Kamal Bezboruah
  • umda rachna…

    Pallavi Bharti
  • I cannot explain how pleasing it is to read such a poetry …. In love with this

    SHIVA
  • Thank you Kaveri, Riya and Neha.
    I am glad that you liked it :)

    Thank you Unnayan, I wish you the same :)

    Anirudh Krishna
  • Very Nice Poem, so Motivational, love each lines.

    Kaveri Singh
  • Very well written, a beautiful Hindi piece!

    Riya Singh
  • It’s beautiful. I don’t have words really.

    वो ही प्रेरणा , वो ही रचना
    वो ही वास्तविकता , वो ही कल्पना ।

    Great use of words :)

    Neha Mimroth
  • Hey Anirudh! Your poem is truly wonderful. I loved how you encapsulated all of what love is and can be in simple polar comparisons. It shows the simple complexity of chaotic peace that love is. Really remarkable, brother.

    Keep writing. Keep inspiring. All my luck and love.

    Unnayan Mishra

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