DILRUBA

BY DEEPAK RAWAT

एक तलक जो देखा उसे,
एक खूबसूरत सा दिन था-"याद है मुझे";
बस एक पल मेँ हो गयी मोहब्बत उस हसीन दिलरुबा से,
उसी दिन जाना मैंने होता है क्या पहली नज़र वाला प्यार;
उसने जो दस्तक दी जीवन में,
दुख-दर्द सब भूल गया जैसे;
मुस्कुराने की वजह मिली उससे,
जीने की दिशा मिली उससे;
बिन-बोले ही सब कह दिया,
इस रिश्ते को हर रिश्ते से उपर कर दिया;
सुकून मिला उस दिल-दे-जिगर के साथ रह कर,
जिसके लिए निकलता है प्यार दिल से बह-बह कर;
बस भगवान से एक गुज़ारिश है,
नज़र ना लगे इस रिश्ते को;
क्योंकि उनके बिना अब ना जी पाएँगे,
न ही लगता है और किसी का साथ निभा पाएँगे;
प्यार इतना है उस दिलरुबा से- की बयाँ नहीं कर सकते,
"लफ्ज़ बहुत कम हैं, 
और अल्फ़ाज़ सारे नम हैं "
उसे बयान करने के लिए,

3 comments

  • अपने दर्द का शिकवा तुमसे कैसे करें,
    मोहब्बत तो हमने की है, तुम तो बेकसूर हो ।

    RANJIT SINGH BHANDARI
  • Wow Deepu awesome work ….Dil me bas gayi har ek line….har ek shabd Ka MATLAB koi pyr Karne wala bakhoobi samajh Sakta hai

    Poonam bhandari
  • सुकून मिला उस दिल-दे-जिगर के साथ रह कर,
    जिसके लिए निकलता है प्यार दिल से बह-बह कर;

    Dil jeet liya bhai Iss line ne, True feelings hai bhai tumhari, Keep writing.

    I also wrote one here https://delhipoetryslam.com/blogs/magazine/drishaya
    Let me know what you think about it. :)

    Anirudh Krishna

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